देश के कई राज्यों में इन दिनों एसआईआर (Systematic Identity Review) का काम जोर-शोर से चल रहा है, जिसके तहत लाखों की संख्या में फर्जी नाम और डुप्लीकेट वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया ने राजनीतिक दलों के बीच तीखी बहस छेड़ दी है, जिसमें एक तरफ बीजेपी इसे चुनावी शुचिता के लिए जरूरी बता रही है, तो वहीं विपक्षी दल इसे वोट काटने की 'साजिश' करार दे रहे हैं।
बंगाल और यूपी में बड़े पैमाने पर नाम हटने की तैयारी
एसआईआर प्रक्रिया के तहत कई राज्यों में मतदाता सूची में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं:
-
बंगाल: रिपोर्ट्स के अनुसार, बंगाल में एसआईआर के बाद करीब 58 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से कटना तय हुआ है।
-
उत्तर प्रदेश: आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह बड़े पैमाने पर नाम हटने की उम्मीद है।
पूर्व बीजेपी सांसद ने उठाए कन्नौज में हार पर सवाल
कन्नौज से पूर्व बीजेपी सांसद सुब्रत पाठक ने बीते लोकसभा चुनाव में मिली अपनी हार को लेकर एसआईआर पर ध्यान न देने को एक बड़ी वजह बताया है।
-
पाठक का दावा: उन्होंने कहा कि अगर हम लोगों ने एसआईआर पर सही से ध्यान दिया होता, तो समाजवादी पार्टी (सपा) दूरबीन लेकर भी ढूंढने को नहीं मिलती।
-
कन्नौज का समीकरण: पाठक ने दावा किया कि अकेले कन्नौज में लगभग 3 लाख वोट कटने जा रहे हैं, और ये वोट बीजेपी के नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कन्नौज की 3 विधानसभा में 3 लाख वोट कटने वाले हैं।
-
वोटिंग पैटर्न पर टिप्पणी: उन्होंने आगे कहा कि बीजेपी कार्यकर्ता पूरी ताकत लगाते हैं तब 50 से 55 प्रतिशत वोट डलवा पाते हैं, वहीं सपा अपने वोट 90 प्रतिशत तक डलवाती है। पाठक के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में घमासान मचा हुआ है।
अखिलेश यादव ने बताया 'वोट कटवा साजिश'
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव शुरुआत से ही एसआईआर को लेकर अपना विरोध जताते रहे हैं। उन्होंने कई बार बीजेपी और चुनाव आयोग को घेरा है।
-
यादव का आरोप: पिछले दिनों उन्होंने आरोप लगाया था कि बीजेपी जहां-जहां हार जाती है, वहां वोट कटवा देती है।
-
संख्या पर चिंता: उन्होंने चिंता जताते हुए कहा था कि यूपी में 3 करोड़ वोटरों के नाम हटाए जाने वाले हैं, और जिस सीट से वह चुने गए हैं, वहां भी 2 लाख वोटरों के नाम कट रहे हैं।
-
निष्कर्ष: उन्होंने सीधे तौर पर एसआईआर की एक्सरसाइज को 'वोट काटने के लिए' होने वाली प्रक्रिया बताया था।
ममता बनर्जी की जवाबी कार्रवाई
बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एसआईआर के तहत काटे गए लोगों का नाम दोबारा जुड़वाने पर जोर दे रही हैं।
-
निर्देश: उन्होंने भवानीपुर में हटाए गए वोटर्स के नामों की नए सिरे से घर-घर जाकर जांच करने का निर्देश देने का फैसला किया है।
-
टीएमसी का रुख: पार्टी सूत्रों ने बताया कि एसआईआर एक्सरसाइज के तहत ड्राफ्ट रोल से करीब 45,000 वोटर्स के नाम हटाए गए हैं। टीएमसी नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि किसी भी वैलिड वोटर का नाम नहीं हटाया जाना चाहिए और हर हटाए गए नाम को फिजिकली वेरीफाई किया जाना चाहिए।
एसआईआर प्रक्रिया, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची की शुद्धता बढ़ाना है, अब 2024 के आम चुनावों के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का एक नया मैदान बन गई है।