महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चव्हाण के एक बयान ने देश की राजनीति में जबरदस्त हलचल मचा दी है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर भारतीय वायुसेना की भूमिका और क्षमता पर सवाल उठाते हुए चव्हाण ने दावा किया कि ऑपरेशन के पहले ही दिन भारत को करारी हार का सामना करना पड़ा था। उनके इस बयान के बाद सत्ता पक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे सीधे तौर पर सेना का अपमान और देशद्रोह से जोड़ दिया गया है। यह मुद्दा अब सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं रह गया, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सेना के सम्मान से जुड़ी गंभीर बहस का रूप ले चुका है।
पृथ्वीराज चव्हाण का विवादित दावा
पृथ्वीराज चव्हाण ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर कहा कि 7 तारीख को करीब आधे घंटे तक चले हवाई संघर्ष में भारतीय वायुसेना को भारी नुकसान हुआ। उनका दावा था कि इस संघर्ष के दौरान भारतीय विमानों को गिराया गया, जिसके बाद हालात इतने गंभीर हो गए कि वायुसेना को अपने सभी विमानों को ग्राउंड करना पड़ा। चव्हाण के मुताबिक उस दिन एक भी विमान उड़ान नहीं भर सका। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ग्वालियर, भटिंडा या सिरसा जैसे किसी भी एयरबेस से विमान उड़ता, तो उसे दुश्मन मार गिरा सकता था, इसलिए पूरी वायुसेना को जमीन पर ही रोकना पड़ा।
चव्हाण ने यह बयान ऐसे समय में दिया है, जब भारत की सैन्य तैयारियों और ऑपरेशनों को लेकर आधिकारिक तौर पर किसी भी तरह की हार की पुष्टि नहीं की गई है। यही वजह है कि उनके बयान को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह तथ्यात्मक जानकारी पर आधारित है या फिर राजनीतिक बयानबाज़ी का हिस्सा।
सत्ताधारी दल का तीखा पलटवार
कांग्रेस नेता के इस बयान पर सत्ताधारी दल ने बेहद आक्रामक रुख अपनाया है। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे ने चव्हाण के बयान को भारतीय सेना का अपमान बताया। शिंदे ने तीखी भाषा में कहा कि जो लोग सेना और प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह के बयान देते हैं, उनकी जनता खुद “कब्र खोदेगी।” उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की कब्र खुदेगी, उन्हें समझ लेना चाहिए कि जनता ऐसे लोगों को माफ नहीं करेगी।
नितेश राणे का कांग्रेस पर हमला
कैबिनेट मंत्री नितेश राणे ने भी कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान से किसी को हैरानी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि कांग्रेस के कई नेता पहले भी पाकिस्तान जैसी भाषा बोलते रहे हैं। राणे ने आरोप लगाया कि पृथ्वीराज चव्हाण ने कुछ नया नहीं कहा है, बल्कि उन्होंने वही बातें दोहराई हैं, जो दुश्मन देश के प्रचार में सुनने को मिलती हैं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर सेना के शौर्य और देश की संप्रभुता पर सवाल उठाने वाला बयान बताया।
सेना के सम्मान बनाम राजनीति
इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति की सीमा क्या होनी चाहिए। एक तरफ कांग्रेस नेता अपने बयान पर कायम हैं और इसे रणनीतिक विश्लेषण के रूप में पेश कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सत्ताधारी दल इसे देशविरोधी और सेना का मनोबल गिराने वाला बता रहा है।
क्या बयानबाज़ी या गंभीर सुरक्षा मुद्दा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाज़ी है या फिर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मामला। विपक्ष का कहना है कि सवाल पूछना लोकतंत्र का हिस्सा है, जबकि सत्ता पक्ष का तर्क है कि सेना और सुरक्षा मामलों पर गैर-जिम्मेदार बयान देश के हितों के खिलाफ जाते हैं।
फिलहाल, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर दिया गया यह बयान राजनीतिक गलियारों में आग की तरह फैल चुका है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कांग्रेस इस बयान से खुद को अलग करती है या फिर इस मुद्दे पर संसद और सड़कों पर सियासी घमासान और तेज होता है।