बिहार में लगातार बढ़ रहे लावारिस कुत्तों के आतंक को लेकर अब राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाने का फैसला किया है। सड़क और ग्रामीण इलाकों में स्ट्रीट डॉग्स के हमलों की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए नीतीश सरकार ने एक नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत राज्य के सभी जिलों में डॉग पाउंड्स बनाए जाएंगे, जहां पकड़े गए लावारिस कुत्तों को सुरक्षित रूप से रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य है कि आम लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों को स्ट्रीट डॉग्स के खतरे से राहत मिले और कुत्तों को भी मानवीय तरीके से आश्रय प्रदान किया जा सके।
जमीन चिह्नित करने के निर्देश
इस योजना को लेकर पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने बिहार के सभी उप विकास आयुक्तों को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि वे डॉग पाउंड के निर्माण के लिए उपयुक्त भूमि की पहचान करें। बुधवार को विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में इसकी औपचारिक जानकारी दी गई। सरकार का स्पष्ट कहना है कि डॉग पाउंड्स का निर्माण जल्द से जल्द शुरू किया जाए, ताकि बढ़ती समस्या पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
जिला परिषद करेगी निर्माण
विज्ञप्ति में बताया गया है कि इन डॉग पाउंड्स का निर्माण जिला परिषदों द्वारा कराया जाएगा। निर्माण कार्य जिला पशुपालन पदाधिकारी की ओर से तैयार किए गए डिजाइन और प्राक्कलन के अनुसार किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डॉग पाउंड्स वैज्ञानिक और मानवीय मानकों के अनुरूप हों, जहां कुत्तों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल सके। इन पाउंड्स में जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से पकड़े गए स्ट्रीट डॉग्स को रखा जाएगा।
खर्च षष्टम राज्य वित्त आयोग की निधि से
सरकार ने इस योजना के लिए वित्तीय प्रबंध भी स्पष्ट कर दिया है। डॉग पाउंड्स के निर्माण पर आने वाला पूरा खर्च षष्टम राज्य वित्त आयोग की सामान्य निधि से वहन किया जाएगा। इससे जिला परिषदों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा और योजना को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह एक दीर्घकालिक समाधान है, जिससे स्ट्रीट डॉग्स की समस्या को व्यवस्थित ढंग से नियंत्रित किया जा सकेगा।
हेल्पलाइन और जागरूकता अभियान
सिर्फ डॉग पाउंड बनाना ही सरकार की रणनीति नहीं है। इसके साथ-साथ जिला परिषदों की ओर से हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए जाएंगे, ताकि लोग लावारिस कुत्तों से जुड़ी शिकायतें आसानी से दर्ज करा सकें। इन हेल्पलाइन नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग इसका लाभ उठा सकें।
पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने बताया कि स्ट्रीट डॉग्स के आतंक की चुनौती से निपटने में जन-जागरूकता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसी को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
ग्राम सभा में होगी चर्चा
सरकार ने यह भी तय किया है कि वार्ड सभा और ग्राम सभा की बैठकों में स्ट्रीट डॉग्स के आतंक से बचाव जैसे मुद्दों पर प्रमुखता से चर्चा की जाएगी। लोगों से अपील की जाएगी कि वे विवाह समारोहों, त्योहारों या अन्य सार्वजनिक कार्यक्रमों के बाद बचा हुआ भोजन खुले में न फेंकें। खुले में फेंका गया भोजन लावारिस कुत्तों की संख्या बढ़ाने का एक बड़ा कारण बनता है। इसके साथ ही कचरे के निष्पादन के लिए भी प्रभावी और व्यवस्थित उपाय अपनाने पर जोर दिया जाएगा।
नोडल पदाधिकारियों की तैनाती
स्ट्रीट डॉग्स से जुड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने प्रशासनिक ढांचा भी तय कर दिया है। जिला स्तर पर जिला पंचायत राज पदाधिकारी, प्रखंड स्तर पर प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी और ग्राम पंचायत स्तर पर पंचायत सचिव को नोडल पदाधिकारी बनाया जाएगा। ये अधिकारी योजना के क्रियान्वयन, निगरानी और समन्वय का काम करेंगे।
जनता को मिलेगी राहत
नीतीश सरकार का यह कदम न सिर्फ लावारिस कुत्तों के आतंक को कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है, बल्कि यह पशु कल्याण और जन सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश भी है। अगर यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो बिहार के ग्रामीण इलाकों में लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है और स्ट्रीट डॉग्स की समस्या पर स्थायी नियंत्रण संभव हो सकेगा।