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नितिन नबीन की लाइफ के टर्निंग पॉइंट्स... बकरी का दूध, ताड़ी की कहानी, मां का डर, गार्ड की गोली, मंच की चूक और...

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Posted On:Wednesday, December 17, 2025

महज 26 साल की उम्र में, अपने पिता के निधन के कारण, अनिच्छा से राजनीति में कदम रखने वाले नितिन नबीन का सफर असाधारण रहा है। उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद उन्होंने एक पुराने इंटरव्यू में अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआती दिनों की कुछ अनमोल यादें साझा की थीं, जो उनके जीवन के टर्निंग पॉइंट को दर्शाती हैं।

नियति ने थमाया राजनीति का टिकट

नितिन नबीन ने अपने इंटरव्यू में खुलासा किया था कि राजनीति उनका कभी सपना नहीं थी, बल्कि यह परिस्थितियों की लिखी हुई नियति थी।

  • राजनीति से दूरी: स्कूल के दिनों में दोस्तों की स्लैम बुक में, 'About Politics' कॉलम में उन्होंने साफ लिखा था कि राजनीति उनके जीवन की 'सबसे खराब याद' है या 'मेरा जीवन का सबसे खराब दिन' है।

  • पिता का निधन: उनके पिता एक विधायक थे, लेकिन 31 दिसंबर 2005 को अचानक उनकी मौत हो गई। नितिन उस समय दिल्ली में अपनी पढ़ाई कर रहे थे और खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखते थे।

  • परिस्थितियों का दबाव: पिता की सीट खाली होने पर, परिवार, पार्टी और इलाके की जनता का दबाव उन पर पड़ा। 25-26 साल की कम उम्र, निजी दुख और अनुभवहीनता के बावजूद, जब बीजेपी नेतृत्व - तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और प्रदेश अध्यक्ष राधामोहन सिंह का फोन आया, तो यह स्पष्ट हो गया कि अब पीछे हटने का कोई विकल्प नहीं बचा था।

पहला चुनाव, जीवन का टर्निंग पॉइंट

नितिन नबीन को मजबूरन 2006 के उपचुनाव में मैदान में उतरना पड़ा। उनका पहला चुनाव और पहली जीत उनके लिए सिर्फ एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि उनके जीवन का एक गहरा टर्निंग पॉइंट थी।

  • डर और जिम्मेदारी: कम उम्र में विधायक बनना जितना गर्व का विषय था, उससे कहीं ज्यादा वह डर और एक बड़ी जिम्मेदारी का एहसास लेकर आया।

  • सीख: उन्होंने बताया कि जनता का भावुक जुड़ाव, सुरक्षा से जुड़ी अप्रत्याशित घटनाएं, और एक छोटी-सी भाषाई चूक ने उन्हें यह सिखाया कि राजनीति में हर शब्द, हर कदम मायने रखते हैं।

जीत के बाद उनके एक बचपन के दोस्त 'टेनी चाचा' ने हल्के-फुल्के अंदाज में पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा, "मैं राजनीति से दूर रहना चाहता था, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि दोस्त ने कहा- शायद यही तुम्हारा वो 'वर्स्ट डे' है।"

आज, नितिन नबीन भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बन गए हैं, जो पार्टी संगठन में सबसे महत्वपूर्ण भूमिकाओं में से एक है। यह सफर इस बात का प्रमाण है कि कई बार राजनीति कोई चुना हुआ सपना नहीं, बल्कि जीवन की अप्रत्याशित परिस्थितियाँ होती हैं, जो अनिच्छुक व्यक्ति को भी नेतृत्व के सर्वोच्च पदों तक पहुंचा देती हैं।


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