कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर एक विवादित बयान देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। चव्हाण ने इस सैन्य ऑपरेशन की सफलता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इसके पहले ही दिन भारत "पूरी तरह से हार गया था"। उनके इस बयान ने भारतीय वायुसेना और सेना के पराक्रम पर भी सवाल उठाए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान पर इसका असर
यह विवादित टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब 'ऑपरेशन सिंदूर' को भारतीय सुरक्षाबलों की प्रभावी और निर्णायक कार्रवाई के रूप में याद किया जाता है।
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पृष्ठभूमि: इस ऑपरेशन को पहलगाम की बैसरन घाटी में निर्दोष पर्यटकों की निर्मम हत्या के जवाब में लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य आतंकवादियों और उनके पनाहगारों को कड़ा सबक सिखाना था।
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कार्रवाई: 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत इंडियन आर्म्ड फोर्सेज ने पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकवादियों के कई ठिकानों को तबाह कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, जब पड़ोसी देश ने दुस्साहस करने की कोशिश की, तो भारतीय सेना ने उनके सैन्य अड्डों पर भी हमला कर भारी नुकसान पहुँचाया। बताया जाता है कि इसके लिए ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का भी इस्तेमाल किया गया था।
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परिणाम: भारत के इस प्रचंड प्रहार से दुश्मन इस तरह दहल गया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को दुनियाभर में शांति की भीख मांगनी पड़ी। पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से संघर्षविराम की गुहार लगाई, जिसके बाद भारत अपनी शर्तों पर सीजफायर के लिए तैयार हुआ।
इस ऑपरेशन से भारतीय सुरक्षाबलों की क्षमता और हनक पूरी दुनिया में स्थापित हुई। ग्लोबल लेवल पर दोस्त और दुश्मन दोनों ने भारत की सैन्य शक्ति का लोहा माना।
चव्हाण के बयान पर हंगामा
ऑपरेशन की इस व्यापक सफलता और अंतरराष्ट्रीय मान्यता के बावजूद, कांग्रेस के दिग्गज नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने एक कार्यक्रम में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के पहले ही दिन भारत पूरी तरह से हार गया था। उनके इस बयान पर तुरंत बवाल मच गया है। यह टिप्पणी कांग्रेस के लिए एक और विवाद बन गई है, और सवाल उठ रहा है कि क्या उन्होंने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर ऐसी बयानबाजी की है।
चव्हाण जैसे एक अनुभवी नेता द्वारा सैन्य कार्रवाई को 'हार' बताना भारतीय सेना के मनोबल पर सवाल उठाता है और पाकिस्तान जैसे विरोधी देश को राजनीतिक लाभ पहुँचाने का काम कर सकता है।
राजनीतिक बयानबाजी का अंतरराष्ट्रीय संदेश
भारत की सैन्य कार्रवाइयों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर जब भी राजनीतिक बयानबाज़ी होती है, तो उसका असर सिर्फ घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसका संदेश भी जाता है।
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर चव्हाण की टिप्पणी ने ऐसा ही एक विवाद खड़ा किया है। यह ऑपरेशन भारत की उस रणनीतिक क्षमता का प्रदर्शन था, जिसमें सीमापार उकसावे का सटीक और सीमित जवाब दिया गया। इसका उद्देश्य स्पष्ट संदेश देना था कि भारत अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। यही वजह है कि इस ऑपरेशन के बाद पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक हलकों में हलचल देखी गई और सेना प्रमुख आसिम मुनीर जैसे शीर्ष सैन्य अधिकारी को भी स्थिति पर सार्वजनिक सफाई देनी पड़ी थी।
चव्हाण का यह बयान राष्ट्रीय सुरक्षा के विषय पर राजनीतिक मतभेद पैदा करता है और इस पर तीखी प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक है।