मुंबई, 17 दिसंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) दुनिया भर में किडनी की बीमारियों का सबसे बड़ा कारण डायबिटीज (मधुमेह) को माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज के मरीजों में किडनी की समस्या एक सामान्य जटिलता है, लेकिन अक्सर मरीज इसके शुरुआती लक्षणों को पहचान नहीं पाते। इसका मुख्य कारण यह है कि किडनी खराब होने की शुरुआत बहुत ही सामान्य लक्षणों से होती है।
शुरुआती लक्षणों को न करें नजरअंदाज बेंगलुरु के एस्टर आरवी अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. हर्षा कुमार एच.एन. के अनुसार, किडनी खराब होने का पहला संकेत शरीर में तरल पदार्थ (फ्लूड) का जमा होना है। जब किडनी अतिरिक्त पानी को बाहर नहीं निकाल पाती, तो पैरों या आंखों के आसपास हल्की सूजन आने लगती है।
इसके अलावा, पेशाब में होने वाले बदलाव भी बड़े संकेत देते हैं:
- झागदार पेशाब: यदि पेशाब में झाग या बुलबुले दिखते हैं, तो यह प्रोटीन लीकेज का संकेत हो सकता है।
- पेशाब का रंग: पेशाब का रंग गहरा या चाय जैसा होना।
- रात में बार-बार पेशाब आना: रात के समय बार-बार शौचालय जाना भी खतरे की घंटी हो सकता है।
- कमजोरी: लगातार थकान, कमजोरी और पीठ के निचले हिस्से में भारीपन महसूस होना।
गंभीर स्थिति के लक्षण (Advanced Signs) डॉ. कुमार बताते हैं कि जब किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो जाती है, तो लक्षण अधिक गंभीर हो जाते हैं। इनमें शामिल हैं:
- अत्यधिक सूजन और सांस लेने में तकलीफ।
- मतली, उल्टी और भूख में कमी।
- त्वचा पर लगातार खुजली और मांसपेशियों में ऐंठन।
- शरीर में विषाक्त पदार्थों (Toxins) के जमा होने से भ्रम की स्थिति या एकाग्रता में कमी।
बचाव और जांच है जरूरी विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज के हर मरीज को साल में कम से कम एक बार UACR (पेशाब की जांच) और eGFR (ब्लड टेस्ट) जरूर करवाना चाहिए। ये टेस्ट बताते हैं कि किडनी कचरे को कितनी अच्छी तरह छान रही है।
डॉक्टर की सलाह: ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखकर किडनी की बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो तुरंत किडनी विशेषज्ञ (Nephrologist) से संपर्क करें।