मुंबई, 17 दिसंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) बॉलीवुड अभिनेत्री निमरत कौर ने हाल ही में समाज में महिलाओं पर शादी के लिए बनाए जाने वाले दबाव और 40 की उम्र के बाद सिंगल रहने के अपने अनुभव पर खुलकर बात की है। निमरत का मानना है कि शादीशुदा होने का मतलब यह कतई नहीं है कि व्यक्ति 'सेटल्ड' है।
शादी का दबाव और 'द लंचबॉक्स' का मोड़ निमरत ने साझा किया कि जब वह 20-22 साल की थीं, तभी से उन पर शादी का दबाव बनाया जाने लगा था। उन्होंने बताया, "जब तक मेरी फिल्म 'द लंचबॉक्स' नहीं आई थी, तब तक लोग मुझे गंभीरता से नहीं लेते थे। फिल्म की सफलता के बाद ही मेरे काम को पहचान मिली और लोगों ने शादी के सवाल पूछने बंद किए।"
दिखावे की शादियों पर उठाया सवाल अभिनेत्री ने उन शादियों पर तंज कसा जो केवल समाज को दिखाने के लिए निभाई जाती हैं। उन्होंने कहा, "मैंने देखा है कि कई लोग उन शादियों में सबसे ज्यादा परेशान और असंतुलित होते हैं जो सिर्फ एक मुखौटा (Front) होती हैं। मेरे लिए यह उस महिला से कहीं अधिक चिंताजनक है जो फिलहाल शादीशुदा नहीं है।"
निमरत ने इस रूढ़िवादी सोच पर भी सवाल उठाया कि शादी ही किसी महिला के जीवन में स्थिरता (Stability) लाने का एकमात्र जरिया है। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर अपनी कंडीशनिंग दूसरों पर थोपने की कोशिश करते हैं।
मनोवैज्ञानिक की राय इस विषय पर मनोवैज्ञानिक अतुल राज का कहना है कि जब कोई महिला सिंगल रहने का चुनाव करती है, तो उसे अक्सर समाज को 'स्पष्टीकरण' देना पड़ता है। यह जांच-पड़ताल महिलाओं में एंग्जायटी और अपराधबोध (Guilt) पैदा कर सकती है। उन्होंने सलाह दी कि अपनी सीमाओं (Boundaries) को स्पष्ट रखना और ऐसे लोगों के साथ समय बिताना जरूरी है जो जीवन की सफलता को केवल वैवाहिक स्थिति से न जोड़ते हों।
निष्कर्ष निमरत कौर की यह बेबाक राय उन महिलाओं के लिए एक प्रेरणा है जो सामाजिक दबाव के बजाय अपनी मर्जी से जीवन जीना चाहती हैं। उनका संदेश साफ है: किसी दिखावे के रिश्ते में रहने से कहीं बेहतर है अपनी शर्तों पर सम्मान के साथ अकेले रहना।