जापान, जो अपनी हाई-स्पीड शिंकानसेन (बुलेट ट्रेनों) के लिए विश्व प्रसिद्ध है, अब गति की दुनिया में एक नया कीर्तिमान स्थापित करने की तैयारी में है। चीन से मिल रही कड़ी टक्कर के बीच, जापान ने अपनी नई मैग्लेव (Maglev) ट्रेन के साथ गति बढ़ाने के लिए कमर कस ली है। इस नई ट्रेन ने रफ्तार की दुनिया में ऐसा 'तूफान' मचाया है कि देखने वाले अपनी आंखों पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं।
रफ्तार का वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें 500 किलोमीटर प्रति घंटे (310 मील प्रति घंटे) की रफ्तार से दौड़ती यह ट्रेन किसी 'अदृश्य शक्ति' की तरह गुजरती हुई दिख रही है।
वायरल वीडियो में एक जापानी रिपोर्टर इस ट्रेन को कवर करने के लिए ट्रैक के पास खड़ा था। वह ट्रेन की गति को जानता था, लेकिन उसकी अत्यधिक गति का उसे अंदाजा नहीं था। जैसे ही ट्रेन आई, वह 500 किमी/घंटा की रफ्तार से उसके सामने से ऐसे गुजरी, जैसे कोई गोली निकली हो। रिपोर्टर कुछ समझ पाता, उससे पहले ही ट्रेन आँखों से ओझल हो गई और सन्नाटा छा गया। रिपोर्टर की अविश्वास भरी हंसी इस घटना की असाधारण प्रकृति को दर्शाती है, और यही वाकया अब इंटरनेट पर वायरल है।
चुओ शिंकानसेन परियोजना
जिस मैग्लेव ट्रेन का वीडियो वायरल हो रहा है, वह जापान की महत्वाकांक्षी 'चुओ शिंकानसेन' (Chuo Shinkansen) परियोजना का हिस्सा है। इस परियोजना के जरिए देश के दो प्रमुख शहरों - टोक्यो और ओसाका - को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा।
परियोजना की राह में कुछ चुनौतियाँ भी हैं:
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डेडलाइन में देरी: इसे मूल रूप से 2027 में शुरू होना था, लेकिन निर्माण की जटिल चुनौतियों के कारण अब इसकी डेडलाइन को बढ़ाकर 2034 तक खिसका दिया गया है।
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बढ़ता बजट: इस प्रोजेक्ट का बजट भी बढ़कर करीब 40 अरब स्विस फ्रैंक तक पहुंच गया है।
मैग्लेव तकनीक: घर्षण मुक्त गति
मैग्लेव (Magnetic Levitation) ट्रेनों की गति का रहस्य उनकी तकनीक में छिपा है। ये ट्रेनें 'चुंबकीय शक्ति' पर चलती हैं।
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तैरती हुई ट्रेन: इसका मतलब है कि यह ट्रेनें पारंपरिक रूप से पटरियों पर दौड़ती नहीं, बल्कि शक्तिशाली सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट (Superconducting Magnets) के इस्तेमाल से पटरियों से थोड़ा ऊपर हवा में तैरती हैं।
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घर्षण का अभाव: चुम्बकीय शक्ति ट्रेन को पटरी से ऊपर उठाती है और साथ ही उसे आगे धकेलती है। चूँकि ट्रेन और पटरी के बीच कोई यांत्रिक संपर्क (No Physical Contact) नहीं होता, इसलिए घर्षण (Friction) पूरी तरह से समाप्त हो जाता है।
घर्षण के अभाव के कारण ही ट्रेन पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में बहुत तेज और शांत चलती है। यही वजह है कि जब यह गुजरती है, तो पारंपरिक ट्रेनों जैसी 'खड़खड़' या कंपन नहीं होता। यह बिल्कुल खामोशी से, एक जेट विमान की तरह सनसनाती हुई निकल जाती है, जो इसे गति की दुनिया का एक अद्भुत चमत्कार बनाता है।