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भारतीय बाजार से लगातार क्यों पैसा निकाल रहे हैं विदेशी निवेशक, ये है बड़ी वजह

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Posted On:Wednesday, December 17, 2025

भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों (FIIs/FPIs) का मोहभंग दिसंबर 2025 में साफ तौर पर दिखा है। पूरे महीने में एक भी दिन ऐसा नहीं आया, जब विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदारी की हो। 1 दिसंबर से 16 दिसंबर के बीच, इन 16 दिनों में विदेशी निवेशकों ने ओवरऑल ₹25,600 करोड़ से ज्यादा की निकासी की है, जिसमें से सिर्फ शेयर बाजार से ही ₹17,000 करोड़ से अधिक निकाले गए हैं।

विदेशी निवेशकों की इस बेरुखी के पीछे कई कारण हैं, जिन्हें विस्तार से समझना जरूरी है।

1. मुद्रा और रिटर्न का असंतुलन

  • रुपये की गिरती कीमतें: विदेशी निवेशकों को रुपये की गिरती कीमतों की वजह से उनके मन मुताबिक रिटर्न नहीं मिल रहा है। जब वे डॉलर को वापस अपनी मुद्रा में बदलते हैं, तो कमजोर रुपये के कारण उनका मुनाफा कम हो जाता है।

  • डॉलर की मजबूती और अमेरिकी बाजार में रिटर्न: डॉलर मजबूत होने के कारण अमेरिकी बाजार में निवेशकों को अच्छा रिटर्न मिल रहा है। इसलिए, वे भारत से पैसा निकालकर विदेशी बाजारों, विशेषकर अमेरिका, में लगा रहे हैं, जहां उन्हें बेहतर जोखिम-समायोजित रिटर्न (Risk-Adjusted Return) मिल रहा है।

2. ग्लोबल सेंटीमेंट और व्यापारिक मुद्दे

  • टैरिफ का प्रभाव: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ जैसे कदमों ने ग्लोबल लेवल पर भारत के प्रति सेंटीमेंट को खराब किया है।

  • ट्रेड डील में देरी: अमेरिका के साथ ट्रेड डील में देरी भी विदेशी निवेशकों के सेंटीमेंट को कमजोर कर रही है। हालांकि, नवंबर महीने का एक्सपोर्ट डेटा सकारात्मक रहा है, लेकिन वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितताएं बनी हुई हैं।

3. बाजार का ओवरवैल्यूएशन और मुनाफावसूली

जानकारों का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार अभी भी ओवरवैल्यूड (Overvalued) बना हुआ है। हाई वैल्यूएशन के कारण विदेशी निवेशकों की ओर से लगातार मुनाफावसूली (Profit Booking) की जा रही है। बाजार को मौजूदा समय में मुख्य रूप से डॉमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) और रिटेल निवेशकों के निवेश ने संभालकर रखा है, जिसकी वजह से उतनी बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिल रही है, जितनी हो सकती थी।

4. सेफ हैवन की डिमांड में इजाफा

मौजूदा समय में ग्लोबली इकोनॉमिक कंडीशंस ठीक नहीं हैं। उच्च महंगाई, ब्याज दरों में वृद्धि और मंदी की आशंकाओं के कारण निवेशकों का रुख सेफ हैवन (Safe Haven) एसेट्स की ओर है।

  • सोने और चांदी की मांग: सोने और चांदी की डिमांड में इजाफा देखने को मिल रहा है, जिसकी वजह से दोनों कीमती मेटल्स के दाम रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गए हैं। निवेशक अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने के लिए इक्विटी जैसे जोखिम भरे एसेट्स से निकलकर कीमती धातुओं में निवेश कर रहे हैं।

FIIs की बेरुखी: पूरे साल के आंकड़े

विदेशी निवेशकों की यह बेरुखी केवल दिसंबर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल देखने को मिली है।

  • निकासी के महीने: यह 2025 का 8वां महीना है, जब विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से पैसा निकाला है।

  • कुल शुद्ध निकासी: इन आठ महीनों में अब तक विदेशी निवेशक शेयर बाजार से कुल ₹2,14,200 करोड़ निकाल चुके हैं।

  • शुद्ध निवेश (एडजस्टेड): हालांकि, चार महीनों में विदेशी निवेशकों ने ₹53,283 करोड़ का निवेश भी किया है। इसे एडजस्ट करने के बाद भी, विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से शुद्ध रूप से ₹1,60,917 करोड़ निकाले हैं, जो एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है।

यह ट्रेंड भारतीय रुपये और बाजार की स्थिरता के लिए एक चिंता का विषय है, लेकिन घरेलू निवेशकों के मजबूत समर्थन ने बाजार को बड़ी गिरावट से बचाए रखा है।


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